मीना ऊँ

मैं युग चेतना हूँ गीता हूँ सुगीता हूँ वेद हूँ विज्ञान हूँ विधि का विधान हूँ जैसा प्रकृति ने चाहा वही इंसान हूंँ मानसपुत्री प्रकृति की सर्वोत्तम कृति सृष्टिï की वही तो हूँ कर्मयोगी, प्रेमयोगी, सत्ययोगी यही है सत्य, यहीं धरा पर है सत्य जब से सृष्टि बनी तभी से सत्य की स्थापना को ईश्वरीय सत्ता माध्यम ढूँढ़कर अपने प्राकृतिक नियमों के हिसाब से तैयार कर ही लेती है। जो भी साधना करते हैं या
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जो कुछ भी करो सोचो या बोलो यह समझकर करना है कि सब कुछ वही परम शक्ति करवा रही है और उसका दिया उसी को अर्पित करना है। उस परम तत्व को जिसे चाहे परमेश्वर कहो, कृष्ण कहो, खुदा कहो या राम-रहीम कहो। जिसको हम अपना परम प्रिय मानते हैं उसे हम कभी भी निरर्थक या गंदी वस्तु तो देना ही नहीं चाहेंगे तो अच्छा ही अच्छा अर्पण करना है। हमारा वेद दर्शन तो कण-कण
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लहू का रंग एक है अमीर क्या गरीब क्या, बने हो एक खा$क से तो दूर क्या करीब क्या ! आओ, सब मिलकर तय करें कि एक मार्ग मानवता का, इंसानियत का ही माना जाए तो क्या यह मंजूर होगा सबको। नई किताब इंसानियत की, नई नीति सरल-सी। नया धर्म जो सब धर्मों का निचोड़ है, सत्य, प्रेम और कर्म, चाहो तो उसे माना मार्ग कह लो। माना का अर्थ है, जो सबको मान्य होगा
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बढ़ना है सुप्रभात की ओर सत्य प्रेम की पकड़ डोर कालगति का सतत् प्रवाह घूम गया सतयुग की ओर कालचक्र घूमा है। समय करवट ले रहा है तभी धरती डोल रही है। सब उन्नत होते मानवों में आंतरिक बेचैनी-सी व्याप गई है, खालीपन कुछ खोया-सा कुछ अजीब सा सूनापन या तटस्थता-सी छाई है दिलों पर। खोल दो दिलों के ताले, उड़ने दो मन पंछी को आज़ाद। अपने अपने सत्य को स्वीकार कर लो। अपने ही
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प्रणाम एक अभियान है मानवता को अपनी सही पहचान बताने का। बाकी कार्य प्रकृति स्वत: ही करा लेगी। अध्यात्म को अपनाया जाता है अच्छा इंसान बनने के लिए। अच्छे इंसान की परिभाषा क्या है? ऐसा इंसान जो तन मन से पूर्ण स्वस्थ हो जिसकी आत्मा आज़ाद हो-सबकी सेवा करने के लिए, सबको प्रेम करने के लिए। अध्यात्म को जीवन में उतारा जाता है ताकि उस परमशक्ति से जुड़कर, शक्ति प्राप्त कर उस शक्ति का प्रयोग
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जागो भारतीयों! रामकृष्ण की धरती, गंगा जमुना की गोदी में पले हिमालय की वेद भूमि वाले मानस पुत्र, पुत्रियों जागो। सम्पूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करने वाले सूर्य चंद्र वंशी तुम सदा ही आपसी फूट के कारण लड़ते-मरते रहे। अपनी शक्ति व अपनी अलौकिकता खोते रहे ताकि अन्य जातियां तुम पर राज कर सकें और सारी संस्कृति, सभ्यता और अलौकिक विद्याएं चुरा-चुरा कर बाहर ले जा कर लाभ उठाते रहे। आपसी फूट और राजशक्ति के मद
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प्रेम की शक्ति पूर्ण पवित्रता में है। प्रेम भगवान है भगवान ही प्रेम है। प्रेम के विकास के सोपान— हम तभी प्रेम करते हैं जब कोई हमें प्रेम करे।हम स्वत: ही प्रेम करे हैं।हम चाहते हैं कि हमें बदले में प्रेम ही मिले।हम प्रेम करते हैं चाहे कोई हमें बदले में प्रेम करे या न करे।हम यह कामना करते हैं कि हमारे प्रेम की प्रशंसा हो, स्वीकृति हो और पहचान हो।अंतत: हम प्रेम करने के
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मुझे जीवन में जो कुछ भी भासित होता है और अनुभव होता है, उसे ठीक से पाठ बनाने की आदत है। फिर मैं इन पाठों में जोड़ती रहती हूं। जब भी मुझे कोई अन्य विषय वस्तु मिलती है या मैं स्वयं कुछ अनुभव करती हूं। इसलिए मेरे पास जीवन के कई पहलुओं पर मेरे अपने लिखित पाठों की अपनी लाइब्रेरी है जो मेरे स्वयं के संदर्भ के लिए मेरे मस्तिष्क में है। केवल मैं इसकी
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युद्ध नकारात्मकता और विनाश हैपर पूर्णता की ओर छंटनी की प्रक्रिया हैअवतार सत्य सनातन धर्म और मानव जीवन के सही आचरण का रक्षक है सत्य धर्मप्रथम मानव अवतार श्रीराम (सूर्यवंशी) ने पाप पर पुण्य की विजय बताने के लिए स्वयं युद्ध लड़ा – ‘और फिर भी…’ संदेश दिया… केवल आध्यात्मिक रूप से सद्गुणी होने से… पाप को हराया जा सकता है। दूसरे मानव अवतार श्रीकृष्ण ने युद्ध में सक्रिय भाग नहीं लिया, लेकिन अर्जुन को
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प्रतीकों की अपनी एक अनोखी दुनिया होती है। वे विभिन्न रूपों जैसे लाइनों, डॉट्स रंगों आदि के माध्यम से बोलते हैं और संपूर्ण शास्त्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये सहज स्फूर्त भाव हैं और आंतरिक सत्य और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए बनाए गए हैं। चूंकि ये शक्तिवान हैं और पूर्ण आंतरिक अभिव्यक्ति हैं, केवल वे ही व्यक्ति जो दृश्य निरूपण के प्रति संवेदनशील हैं, इनसे संयुक्त हो इनका रहस्य बता सकते हैं। उदाहरण
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