नाश करने वाले हम कौन?
हे मानव ! पहले सत्य धर्म तो जान, धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो यह नारा लगाने वालों ने जाने अनजाने ही मानवता व सत्य धर्म का काफी अनिष्ट कर दिया है। लोग सच्चा धर्म क्या है यह भूल ही गए हैं। ''नाश'' किसी का भी करने वाले या इसकी गुहार लगाने वाले हम कौन? आश्चर्य तो तब होता है जब बड़े-बड़े ज्ञानी ध्यानी गुणी मानव इन शब्दों का प्रयोग करते हैं। यह जानते हुए कि शब्द ब्रह्मास्त्र होते हैं अनुचित प्रयोग से घूमकर, boomerang, वार करते हैं। अपने में सत्यता है तो अपनी लाईन बड़ी करो बड़प्पन दिखाओ प्रभुता लाओ असत्य स्वत: ही अपनी स्थिति समझ जायेगा। हे मानव! पहले यह ज्ञान तो जान कि अधर्म है क्या। अनजाने व अबूझे अधर्म के नाश के चक्कर में अपने ही दिव्य अस्तित्व का नाश कर रहा है। सूर्य अपनी महानता का ढिंढोरा नहीं पीटता जब निकलता है तो…
