आस्था

आस्था से हो सब मंगलमय ऐसा हो बदन कि कृष्ण का मंदिर दिखाई दे ऐसा हो जाए मन कि बस कृष्ण ही कृष्ण सुझाई दे खुले रक्खो मन के दरवाजे खोल दो दिलों के सब ताले सत्य प्रेम व कर्म में पूर्ण आस्था की चाबी से जीवन का यही तत्व सत्व बतावे प्रणाम यही सत्य है यहीं सत्य है

तेरा ही साया

हरे कृष्ण हरे मुरारी इंतजार जि़न्दगी बना प्यार बंदगी बना दर्द धड़कन बना जो तूने बनाया वो ही तो मैं बना तुझ-सा ही तो बना तुझ-सा क्यों कहूँ मैं तो तू ही तू तो बना अब और क्या बाकी रहा कृष्ण था कृष्ण ही रहा जो तूने सहा वही तो सहा जो तूने कहलवाया वही तो कहा तभी तो प्रणाम तेरा ही साया गीता प्रणाम हुआ यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

दामन का अँधेरा

जो बाँटता फिरता है जमाने को उजाले उसके दामन में लेकिन अँधेरा भी बहुत है क्या कमी की मेरे कृष्ण ने विश्व को उजागर करने में सत्य का आधार देने में अनन्त प्रकाश से प्रकाशित करने में मगर किसने देखा किसने जाना उनके दामन उनके मन का अँधेरा घना अँधेरा मैं जानूँ मैं समझूँ मैं भोगूँ उस दिल का घना अँधेरा जो लाए सवेरा यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

आँखमिचौनी

कोई किसी के लिए कुछ नहीं करता सब कुछ होता जाता है अपने आप सब अपना ही कुछ कर्म कर अपने ही कुछ गुन खेल बिछुड़ जाते हैं न मिलने की खुशी होती है न बिछुड़ने का गम होता है जब होता है बस प्रभु ही प्रभु हमदम सब लीला ही तो चलती है फैलना सिमटना आँखमिचौनी जैसा खेल पर तू तो चल अकेला चल अकेला तेरा मेला पीछे छूटा राही यहाँ किससे कहूँ मेरे साथ चल यहाँ सबके सिर से सलीब है यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

प्रकृति का संतुलन

प्रकृति का सुर-ताल सम्पूर्ण सम पर सम पृथ्वी घूमे चंद्र घूमे नक्षत्र घूमे नचाए सूर्य नाचने वाला नचाने वाला दोनों ही प्रकृति के नृत्य में रत लयबद्ध तालबद्ध सम पर सम अनुपम अलौकिक चंद्रग्रहण सूर्यग्रहण बस रहते अपने-अपने नृत्य में मग्न खूब घूमते रहें घुमाते रहें पर जब प्रकृति की बजे ताली समय की ताल पर सम पर सम तो एक सीध में आते फिर से घूम जाने को घूमने-घुमाने को फिर से एक लय में आने को जब बजे प्रकृति की ताली समय की ताल पर सम पर सम सटीक संतुलन प्रकृति का संतुलन यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

प्रकृति का अंश

सफर तो चला ही आ रहा है मेरा सदियों से चलेगा सदियों तक जब तक चाँद और सूरज ये धरती ये आसमां ये सारे के सारे सातों जहाँ मेरा रथ घुमाएँ ब्रह्मïाण्ड ब्रह्मïाण्ड और देखूँ मैं प्रकृति माँ का खेला बन प्रकृति का अंश यही तो है मेरा वंश चले करोड़ों-करोड़ों प्रकाशवर्ष मीना मनु मानस पुत्री प्रकृति की चलाए उसी प्रकृति का वंश सहकर समय दंश बीतते रहें वर्ष के वर्ष बस यही धुन होए उत्कर्ष उत्कर्ष ही उत्कर्ष सदा सहर्ष यही सत्य है !! यहीं सत्य है !! प्रणाम मीना ऊँ

घर की बात

समझौते के बल पर जो घर बनता है वह घर नहीं मकान होता है घर प्यार पर बनता है प्यार का घर बने न बने वो तो बस प्यार सिर्फ प्यार ही होता है जो हो गया सो हो गया अब घर बने या न बने प्यार तो प्यार होता है दुनिया का दिखावा होता है बसता तो कोई बसता तो कोई लाखों में एक होता है पर 'मैं तो सारी सृष्टि सारे संसार में बसती हूँ' यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

आत्मानुभूति का कोई शॉर्टकट नहीं

बड़ी तपस्या के बाद ही एक ऐसा भगवद्स्वरूप व्यक्तित्व उभरता है जिसके दर्शन में शीतलता प्रत्येक क्रिया में मधुरता वाणी में ओज और उपस्थिति में अद्भुत तेज होता है यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

ज्ञान दान का फल

ज्ञान दान का फल पृथ्वी दान समान मेरे गुरु भी वही गोविन्द भी वही दे रहे जो ज्ञान जब भी धरूँ ध्यान मीना जानी प्रभु वाणी नर बने नारायण नारी बने नारायणी यही गीता वाणी मीना जानी यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

ज्ञान-ध्यान

प्रभुमयी सूर्यमयी चन्द्रमयी हुई प्रभु प्रसाद पायो पायो अनमोल रतन कर जतन ब्रह्माण्ड स्वयं पढ़ावें समझ न आवे कैसे हुआ यह चमत्कार ज्ञान आवै आपै-आप ज्ञान-ध्यान की महिमा अपार प्रभु कृपा अपरम्पार सत्यमेव जयते तमसो मा ज्योतिर्गमय स्वाध्याय योग सिद्ध हुआ यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ