धूल साफ की

मन के शीशे से धूल साफ की खूब देखा जमाने का रंग पैसे का संग दिमाग के खेलों का रंग अहम् का ढंग पर सच सच के पास ही जाएगा पर सच सच के पास ही जाएगा यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

अग्निपथ

शुक्र का सूर्य परागमन हुआ वीनस सौंदर्य का प्रतीक एकदम ठंडा व एकदम गर्म दोनों का संतुलन ही सौंदर्य उपजाए अग्निपथ से तप कर शुद्ध तो होना ही होता है शुरू कर दी है यह यात्रा तपस्यामयी जिन्होंने प्रणाम के प्रवाह के साथ-साथ वो तो आसानी से जाएँगे गुज़र होकर जीवन की हर बाधा से तर युगों जैसे वर्षों से मेरी बातें सुन-सुन क्रोध मेरा कर सहन प्रताड़नाओं का मर्म गुन गुन तैयार हो रहे अपनी ही समर्पण की शक्ति से निर्मल भक्ति से अथक प्रयत्न से सतत् कर्म से गुज़रते रहेंगे हर पीड़ा से हर तरह की पीड़ा से पर टिके रह पाएँगे वो ही जो होंगे पूर्ण ज्ञान कर्म व भक्ति से यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

अवतार चेतना

मीना अवतारों की शृंखला से जुड़ी उसी माला में पिरोई ईश्वर मत्स्यावतार से कल्कि तक का सफर मेरा सफर यह शरीर धारण करती है अवतार चेतना जहाँ तक उसे पहुँचाना होता है पहुँचाकर दूसरा शरीर धर लेगी दूसरा शरीर धर लेगी बदल लेगी अवतार चेतना स्वत: ही पुराने कपड़ों की तरह ये नश्वर शरीर पर सदा ही मार्गदर्शन देती सारी सृष्टि का खेल सारा का सारा सम्पूर्णता से दिखाती बताती सम्पूर्णता से दिखाती बताती नित निरंतर क्षण-क्षण संदेश औ' निर्देश देती अंतर्वाणी सुनाती विधान जुटाती पुराने में नया जोड़ सत्यता का भान कराती हजारों विधाओं से लुभाती-रिझाती समय का संकेत बताती कि अबकी न जाना चूक ओ मानव क्योंकि युगों-युगों से बताया है तुम्हें बता ही तो दिया है क्या होती है अवतार चेतना की बात उसका रूप औ' स्वरूप तो भई न जाना भूल समझ लो यह ज्ञान अनूप आज ही अभी बस अभी कल गया वक्त होऊँगी की…

जीतने की उमंग

जीतने की उमंग की तरंग थमने न पाए जीत जाने के उद्यम का श्रम रुकने न पाए सत्य कर्म प्रेम का माना मार्ग जो भी अपनाए ऐसे आत्मबली मानव के प्रभु हो जाते स्वयं सहाय जीत जाएँगे हम अगर तू साथ है अगर तू साथ है अगर तू साथ है ओ कन्हाई यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

प्रकृति का खेला

प्रकृति सदा ही गोलाकार गोलाइयाँ लिए रचना रचती है सारे ब्रह्माण्डीय नक्षत्र सितारे ग्रह गोलाइयाँ लिए हैं अपने आप जलते-सुलगते ठंडे पड़ते बिगड़ते और बिगड़कर फिर-फिर बनते बनते ही रहते सदा कर्मरत प्रकृति की प्रगति औ' उत्थान प्रक्रिया में संलग्न संघर्ष करते अनवरत अपनी सत्ता को मनवाते से अपनी-अपनी सामर्थ्यानुसार ब्रह्माण्ड को सौंदर्यमय बनाते से सम्पूर्ण सृष्टि की अनन्त व्यवस्था में पूर्ण योगदान देते जीवंत रहकर जीवंतता प्रदान करते कांटे ही सीधे होते हैं अकड़े खड़े रहते हैं टूट जाएँ पर अकड़ नहीं जाती चुभने पर देते हैं बस टीस ही पर देखो तो प्रकृति माँ की उदारता उन्हें भी पूर्ण पोषण दे एक कर्म दे दिया सुंदर फूलों और जड़ी-बूटियों की सुरक्षा का प्रकृति का स्वरूप बिगाड़ने वालों को सज़ा का प्रकृति का खेला अनूप नहीं अस्तित्व विहीन किसी का भी स्वरूप यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

मीना अणु है जीवन गति

मनु का सत्य : भाग- 2 मनु अणु का विस्तार मेरे से बाद मेरे से पहले कुछ भी नहीं मेरा अस्तित्व बीच में तुम नाचो चहुँओर पास आकर फिर भागो दूर-दूर भागो, भागते रहो युगों-युगों से यह भागदौड़ तो तभी समाप्त होगी जब मुझ जैसे ही पारदर्शी पारे की तरह होकर मुझमें ही विलय हो जाओगे पूर्ण ज्ञान-विज्ञान है जो नहीं जाना गया वही अज्ञान है मीना अणु है अणु का विज्ञान है मीना अणु पूर्णता का तत्व है यही मनु का सत्य है यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

मीना अणु है

भाग 1 : मीना का विज्ञान प्रभु - Supreme - परम प्रभुता - Supremacy - परमता परम तत्व अणु तत्व - Essence of atom सत्य का तत्व - Essence of truth अणु - Atom-essence of whole & complete पूर्णता का तत्व अपनी पूर्णता में स्थिर मीना तुम मेरे चारों ओर आ जाते हो इर्द-गिर्द घूमते हो मेरे ही आसपास ऊर्जा पाकर लेकर फिर दूर भाग जाते हो अपने कर्म खेलने खिलाने को पर मेरी परिधि से दूर भी नहीं हो पाते हो बस पास आने और दूर जाने का क्रम चलता रहता है और चलता ही रहेगा जब तक तुम मेरी ही तरह पूर्ण होकर अपने में ही स्थित नहीं हो जाते अपना एक पूर्ण अस्तित्व बनाते अपना एक पूर्ण अस्तित्व बनाते जब वो हो जोओगे तो मेरे पारदर्शी पारे जैसे पारे जैसे अस्तित्व में समाकर पूर्ण योग विलय समरूप तो एक ही हो जाओगे एकाकार हो जाओगे मेरे से…

मीना की चेतना

मनु मेरे लिखने का नाम मेरे अंतर के लेखक का नाम मनु मेरे अंतर की आत्मानुभूति का नाम मीना ऊँ मेरे सांसारिक संबोधन का नाम मीना जी यही है मीना ऊँ मीना ओऽम् अनुभूति योग अनेकों अव्यवस्थाओं को व्यवस्थित रखने की चेतना का नाम ही मीना है जो पूर्णता का नित्य प्रवाह है शान्त क्रियाशील व सर्वसमर्थ है शिक्षा वेद की ब्रह्माण्ड ज्ञान की औ' प्रकृति के विधान की स्वयं युगचेतना की परम कृपा से पाकर जानकर जीकर ब्रह्मï तत्व जागृत करा कर पाया परमबोधि से योग का परमानन्द मीना नामधारी जीवात्मा ने मीना मानवी ने ब्रह्मï तत्व पायो यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ

तुम जानो हो कृष्ण

ओ मेरे कृष्ण खुश हो ना अब तो तुम अब तो मुझे कभी भी छोड़कर नहीं जाओगे न तुम जा ही नहीं सकते इतनी तपस्या इतनी परीक्षाएँ ले लीं यही चाहते थे न तुम कि तुम्हारे ही धर्म सत्य प्रेम और कर्म पर टिकी रहूँ तुम ही हो जाऊँ कोई भी ऐसा पहलू जि़न्दगी का जिसे मैं छू न सकूँ कोई भी वातावरण जिसे मैं झेल न पाऊँ तुमने छोड़ा ही नहीं जानती हूँ ये सब तुमने ही मुझे भुगतवाया सब भुगतवाया सब कुछ करवाया तुम ही सारथी बन सब जगह ले गये फिराया घुमाया सारा का सारा संसार का कारोबार दिखाया उसमें रमा कर रहकर भी अछूता रखकर वैराग्य का पाठ पक्का कराया सत्य रूप बता दिया महाभारत में तुमने अर्जुन चुना यही पाठ पढ़ाने को जैसी उसकी योग्यता क्षमता थी वहीं तक उसे बताया समझाया जानती हूँ तुम मुझसे करते हो सबसे ज्यादा प्यार तभी तो दम लिया…

सत्य की सत्ता

सत्य की सर्वशक्तिमान सत्ता करोड़ों सूर्यों से भी तेजवान प्रकाश से भी वेगवान कर दे सम्पूर्ण सृष्टि उजागर वह तेरे ही भीतर तो है देख समझ पहचान धर के ध्यान सत्य ही आगे आएगा झूठ का भरम मिट जाएगा नई आशा जगी है मन में पूर्ण विश्वास है मानवता में आएगा वही सवेरा जो होगा प्रणाम के मन का बसेरा प्रभु के मन का सवेरा जय श्री कृष्ण आज मोरे अँगना श्याम रंग बरसे यही सत्य है यहीं सत्य है प्रणाम मीना ऊँ