हमारे पास कार्य करने के लिए ज्ञान साधन और उपकरण हो सकते हैं, लेकिन शक्ति बल या सही मार्गदर्शन के बिना, हम कुछ भी प्राप्ति नहीं कर सकते। ब्रह्माण्ड में कोई ज्ञान नहीं है। उसमें केवल ऊर्जा होती है जो ज्ञान को प्रवाहित करती जाती है। सभी विकसित आत्माओं के विचार और ज्ञान वहां रहते हैं। इन ऊर्जाओं क आह्वान करके उन सब विकसित लोगों से जुड़कर, हम उनका शुद्ध ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि उनका आवाहन करना और पुकारना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए यदि आप एक कलाकार हैं, तो देवी सरस्वती को प्रज्वलित करें। यदि चित्रकारी की आकांक्षा है तो प्रारम्भ में यह आपकी रेखाओं में कुछ बल लाएगा। फिर जैसे-जैसे अभ्यास बढ़ेगा, पकेगा यही रेखाएं जीवंत हो उठेंगी, रंग भी स्पंदित होने लगेंगे। यदि लेखन कौशल में सुधार लाना है, तो विकसित लेखकों से जुड़े रहें, और उनके विचार आपकी लिखित अभिव्यक्ति में…