तमस की निद्रा से जाग !

हे मानव ! इतने सारे बुद्धिमान मानव होते हुए भी विश्व विवेकहीन महामूर्खों की बस्ती बन कर रह गया है। एक ओर महामारी कोविड-19 कोरोना से लड़ने हेतु अंधाधुंध व्यय कर रहा है। सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त कर आधी-अधूरी व्यवस्थाएं कर रहा है। उनको बचाने हेतु जिनका कि शायद मानव समाज देश और विश्व हित में कोई भी योगदान न हो। दूसरी ओर अपरिमित धन व्यय कर रहा है युद्ध के लिए आयुधों पर उनको मारने के लिए जो हृष्ट पुष्ट हैं नौजवान हैं विश्व का भविष्य हैं। ऊपर से पर्यावरण का सत्यानाश। वाह रे मानव ! बलिहारी तेरी दोगली नीति की । मानव का इतना पतन परम बोधि व प्रकृति को कभी भी मान्य ना होगा प्रकृति अब अपने हिसाब से छंटनी करके ही रहेगी। प्रकृति के इस प्रकोप कोरोना को कम करने की प्रार्थना करना तथा सावधानी रखने का प्रयत्न करना तो स्वाभाविक व उचित ही है पर इसके…

स्वस्तिक

सर्व मांगलिक प्रतीक स्वस्तिक प्रतीक अपने आप में पूर्ण भावानुभूति है। वैदिक संस्कृति आध्यात्म और वेद-विज्ञान का अनूठा सत्य है। प्रत्येक सम्प्रदायों मतों व धर्मानुयायियों ने प्रतीकों का महत्व समझा और अपनी अपनी प्रमाणिक पृष्ठिभूमि के अनुसार इनको प्रतिष्ठित किया है। परंतु भारतीय वेद संस्कृति के परम कल्याणकारी मंगलकारी शुभ व पवित्र स्वस्तिक समान शक्तिमान व दीप्तिमान कोई नहीं है। क्यों कि यह अविष्कृत नहीं है। वैदिक काल के ऋषि मुनी वैज्ञानिकों द्वारा सभी दिशाओं की ऊर्जाओं और शक्तियों का अनुभूत सत्य है। स्वस्तिक आकार अनादि काल से ही विद्यमान है और भारतीय संस्कृति के साथ अभिन्‍न रूप से जुड़ा है। सभी कार्यों व धार्मिक अनुष्ठानों को कल्याणकारी बनाने हेतु सर्वप्रथम प्रतिष्ठित कर पूजा जाता है क्योंकि स्वस्तिक श्री गणेश श्री लक्ष्मी श्री विष्णु आदि दिव्य सत्ताओं का प्रतीक है। स्वस्तिक शब्द, सु-श्रेष्ठ, अस अस्तित्व और क-करने वाला इन सबका संगम है। अर्थात सभी दिशाओं में सबका कल्याण हो। इसका…

प्रकृति का प्रकोप

हे मानव ! तू बहुत चतुर व बुद्धिमान बनता है। अत्यधिक सुख-सुविधाएं धन साधन आदि संग्रह कर लिया। प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का भी किन स्वार्थ हेतु खूब दोहन कर लिया। पर कभी यह ध्यान न आया कि जब प्रकृति अपना हिसाब मांगेगी तो कया होगा। प्रकृति का बाह्य व आंतरिक आपदाएं लाकर अपूर्णताएं संहार कर संतुलन लाने का अपना ही विधान है। बाह्य आपदाएं-भूचाल बाढ़ तूफान अग्नि प्रकोप ओलावृष्टि भूस्खलन आदि। आंतरिक आपदाएं-आधि व्याधि ताप विषाद शारीरिक कष्ट आदि, ऐसे रोग जो भौतिक विज्ञान की पकड़ में भी ना आएं । जिस प्रकार परम चेतना का उत्थान निरंतर होता ही रहता है वैसे ही मानव बुद्धि और ज्ञान विज्ञान का भी विकास होता है। पर जब ज्ञान विज्ञान का दुरुपयोग अहमयुक्त स्वार्थी मनोबुद्धि के अनुरूप होने लगता है तो प्रकृति अपनी वो शक्ति दिखा ही देती है। जिसे समझना या नियंत्रण कर पाना मानवीय क्षमताओं से परे होता है। मानव…

आतंकवाद का सम्प्रदाय

मानवता का सफाया स्वर्ग प्राप्ति हेतु कलियुग में आतंकवाद एक अमरबेल की तरह सम्पूर्ण मानवता पर छाता जा रहा है। कहां नहीं है यह राक्षस, निम्नतम स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक पूरी मानवता इससे त्रस्त है। धमकाकर डराकर उकसाकर बहलाकर दबाव डालकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना, अपनी पाश्विक प्रवृतियों को तृप्त करना, मानव अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझने लगा है। इसके इतने प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में ऐसे व्याप्त हो गये हैं कि बिना अपराध बोध के जीवन जीने की शैली ही बनते जा रहे हैं। हाँ जब बड़े वीभस्त और भयंकर कांड होते हैं तो सब जनता मीडिया नेता धार्मिक गुरु ज्ञान बांचने लगते हैं कि आतंकवाद समाप्त होना चाहिए। अरे पत्तों और टहनियों को काटने से क्या होगा। आतंकी मानसिकता के बीज तो समाज में लगातार बोए ही जा रहे हैं जो वृहद्‌ रूप धारण तो करेंगे ही। स्कूलों में नंबर कम आने का डर दिखा ट्यूशन से पैसा…

प्रणाम के दैनिक सत्र सामूहिक प्रार्थना हेतु

सामूहिक प्रार्थना में महान शक्ति होती हैजब इसको एक दिशा दी जाए तो यह शक्ति सामूहिक रूपान्तरण के सूत्रपात में प्रयुक्त हो सकती है।प्रणाम सबको पुकारता है कि 10 बजे रात्रि सब संयुक्त होकर मानवता की भलाई और सत्य धर्म की पुनर्स्थापना हेतु प्रार्थना करें।10 अंक पूर्णता का द्योतक होने के साथ-साथ 10वें अवतार श्री विष्णु का भी प्रतिनिधित्व करता है। जो कि इस युग में सचेतन है। मानव शरीर में भी मुख्य 10 प्रणाली तंत्र हैं- श्वॉस प्रणाली, नाड़ी तंत्र प्रणाली आदि। ये सभी सही व सुचारु रूप से कर्म कर सकें ताकि दिव्य विधान में अपना पात्र मानव सही रूप से निभा सके। भाग लेने हेतु ट्विटर हैंडल @meenapranam पर सम्पर्क करें।

प्रणाम सकारात्मकता…

वाट्सअप आधारित कम समय का कोर्सतीन स्तरों 1. 2. 3. पर हैप्रत्येक स्तर प्रगतिशील ध्यान, चैतन्यता व सचेतनता की ओर ले जाता है।इस कार्यक्रम की विशिष्टता-प्रणाम की आकांक्षा है मानव की सभी क्षमताओं को उस उत्थान बिन्दु तक प्रगति हो जहां वो योग्यताएं बन जाएं और मानव की संवेदनाएं उन्नत संवेदनशीलता में बदल जाए जिससे कि प्रकृति के नियमों पर आधारित पूर्ण रूपांतरण की प्राप्ति हो।यह प्रत्येक मानव का उत्तरदायित्व है कि परिवर्तन की ओर कर्म करे।वह परम चेतना जो सबमें व्याप्त है और सदा प्रगतिशील है वो उनके चयन को तत्पर रहती है जो अपनी आंतरिक उन्नति दर्शाते हैं।प्रणाम का सकारात्मकता मार्ग, जी.पी.एस. की तरह कार्य करता है। यह सबसे प्रभावशाली मार्ग बताता और सुझाता है ताकि हम अपनी यात्रा, आंतरिक सत्य के खोज की, लाभकारी रूप से प्रारम्भ कर सकें।यह कार्यक्रम लेक्चर और प्रवचन देने से बचता है। आपसी संवाद को प्रोत्साहन देता है ताकि सभी साधकों के…

सामूहिक प्रार्थना के दैनिक प्रणाम सत्र

सामूहिक शक्ति में बड़ी क्षमता होती है। जब चैनलाइज किया जाता है, तो इस बल का उपयोग बड़े पैमाने पर परिवर्तन शुरू करने के लिए किया जा सकता है।प्रणाम हर रात 10 बजे कनेक्ट करने के लिए हर रात मानवता की चिकित्सा करने और सच्चे धर्म को फिर से जीवित करने के लिए कहता है।10 की गिनती पूर्णता के प्रतिनिधि होने के अलावा, इस युग में सक्रिय विष्णु के 10वें अवतार को भी दर्शाता है। शरीर की 10 मुख्य प्रणालियाँ हैं। श्वसन प्रणाली, तंत्रिका तंत्र इत्यादि, इसलिए ये भी मानव को दिव्य डिजाइन में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह से काम करने की आवश्यकता है। इसमें शामिल होने के लिए, बस @meenapranam को हैंडल करके ट्विटर पर हमसे जुड़ें।।

प्रणाम सकारात्मकता…

एक व्हाट्सएप आधारित लघु अवधि पाठ्यक्रम स्तर - 1,2, 3प्रत्येक स्तर प्रगतिशील ध्यान, जागरूकता और मनमर्जी की दिशा में काम करता है। इस कार्यक्रम की विशिष्टता : प्रणाम मानव क्षमताओं को उस विकासवादी बिंदु पर विकसित करने की इच्छा रखते हैं जहां वे क्षमता बनते हैं, और मानवीय संवेदनाओं को चैनलाइज करते हैं जहां वे संवेदनशीलता बन जाते हैं ताकि प्रकृति के नियम के आधार पर कुल परिवर्तन प्राप्त कर सकें। परिवर्तन की दिशा में काम करना सभी मनुष्यों की समान जिम्मेदारी है। सर्वोच्च चेतना जो सभी में निवास करती है, कभी विकसित होती है और जो भीतर की वृद्धि दिखाती है, उसके लिए बाहर दिखती है। प्रणाम का पॉजिटिविटी का काम जीपीएस की तरह करता है और सबसे प्रभावी रास्ता सुझाता है, ताकि हम यात्रा शुरू कर सकें। हमारे आंतरिक सत्य की खोज की दिशा में उत्पादक कदम। कार्यक्रम व्याख्यान और उपदेश देने से परहेज करता है। सहभागिता को…

पृथ्वी दिवस…

हम सभी पाँच तत्वों से बने हैं, इनमें से चार - वायु जल अग्नि और ईथर सार्वभौमिक हैं और पूरे ब्रह्मांड में विभिन्‍न रूपों में पाए जाते हैं, जबकि यह केवल पृथ्वी तत्व है, जो हमारे ग्रह का पंच-महाभूत पूरा करता है - सृष्टि के लिए आवश्यक हैं पांचों तत्व। आज पृथ्वी दिवस है… लेकिन वास्तव में इस ग्रह पर हमारे लिए, प्रतिदिन ही पृथ्वीदिवस होना चाहिए। भारतीय संस्कृति ने हमेशा प्राकृतिक ऊर्जा को देवताओं के रूप में माना है और पृथ्वीको माता के रूप में देखा जाता है। पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जो हर ऊर्जा को, सृजन के लिए, सटीक अनुपात में आकर्षित करता है, चाहे सूर्य की रोशनी हो या चांद की चांदनी। पृथ्वी जीवन का उद्गमस्थल है। परम्परागत रूप से, भू देवी पृथ्वी की अध्यक्षता करने वाली देवी हैं। उसके विभिन्‍न रूप हैं जो उसकी अद्वितीय प्रकृति और सृजन में उसकी महत्ता को परिभाषित करते हैं।…

दिमाग को एक तरफ रक्खे

जब हमारा मन भ्रमण करता है तो हम मनुष्यों को मनोरंजन लगता है, दिवास्वनमनोरंजक हो सकता है… और कई बार हमें एहसास भी नहीं होता कि यह हो रहा है।और हम इसे बढ़ाते जाते हैं… “उसने यह कहा', “मैं बदले में यह करूंगा' और विचारघूमते रहते हैं, कभी छोड़कर नहीं जाते। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि मन एक बेचैनबंदर की तरह है जिसने शराब की सैकड़ों बोतलों का सेवन किया है और उसके ऊपरकई बिच्छुओं ने डंक मारा है… बस कल्पना करें कि वह कैसा व्यवहार करेगा। यही एक बेचैन दिमाग की स्थिति है। गीता में अर्जुन कहते हैं कि मन की गति को मापना बहुत कठिन है। कोई भी मन काप्रबंधन कैसे कर सकता है? जिसका श्रीकृष्ण जवाब देते हैं, निश्चय ही यह कठिन है। मुझे पता है… लेकिन इसे अभ्यास से दूर किया जा सकता है। अपने मन को “हरि नाम' का पथ्य दे दें।” जिस क्षण यह…