कलियुग का सत्य
हे मानव ! अब यह सत्य भली प्रकार जान-समझ ले कि कलियुग में सच्चिदानंद का सत्य स्वरूप और वेद व विज्ञान का पूर्ण रहस्य जानने के लिए सुपात्र होना ही होगा। कालचक्रानुसार कलिकाल प्रकृति व ब्रह्माण्ड के सारे सत्यों व रहस्यों का महत्व जानने का, झूठ की दुकानें बंद कराने का सारे व्यवधान व अंतराल मिटाने का मानव जीवन का सही उद्देश्य जानने का युग है। यह युग है सारी विषमताओं व दुविधाओं का वैज्ञानिक कारण जानने का, अपूर्णता तथा असत्य के संहार का, अर्जुन को भी कृष्ण बनाने का ताकि सब हों कृष्णमय, ज्ञानमय, प्रकाशमय तथा कर्ममय ताकि अब न उजड़ें, बसे बसाए राज्य, ले अहंकार और अकर्मण्यता की आड़। हे मानव ! कलियुग तो है ही सतयुग के सुप्रभात की तैयारी का मंच, इसलिए इसकी एक ही मांग है सत्यमय हो जा। कलियुग में वेद व विज्ञान का इतना प्रचार व विस्तार हो चुका होता है कि दोनों…
