युगदृष्टा दोहराए नहीं जाते
सच्चे और वास्तविक युगदृष्टा या युग प्रवर्तक जो पूर्णता उत्थान व रूपांतरण की गति को दिशा व दशा देने आते हैं वो कभी भी एक जैसे नहीं होते न ही दोहराए जाते हैं। उनके शरीर छोड़ने के बाद उनका 'भाव' और अधिक उन्नत होकर नया रूप लेकर अवतरित होता है जिसे मानव फिर नहीं समझ पाते क्योंकि वो बीत गई छवि को या मन में बनाई किसी छवि विशेष को ही चिपके रहते हैं और उसी की पूजा-अर्चना प्रचार व प्रसार करने में ही अपने को धन्य मानते रहते हैं। क्योंकि वो जीवित नहीं है उनसे प्रश्न नहीं कर सकता, न ही कह सकता है कि 'तूने अपने पर मेरे मार्गदर्शन अनुसार काम तो किया नहीं इसीलिए भटक रहा है' और वो उसको जो अब मूर्ति या तस्वीर रूप में है उसे सब कुछ सुना सकते हैं। शिकायत मनुहार अपेक्षा आदि कर सकते हैं। हे मानव! यह सत्य समझ ले…
