भारत भाग्य विधाता कहां हो – भारत भाग्य विधाता कहां न हो
हे सनातन मानव ! तू कहां खो गया है इतनी गिरावट-अधोगति कि मानव त्राहि त्राहि कर रहा है मानवता घुट घुट कर दम तोड़ रही है। क्या ये पढ़े लिखे लोग हैं इनकी शिक्षा दीक्षा कहां की है। भाषणों का स्तर केवल अपनी ही आत्म प्रशंसा और बाकी सबकी भर्तसना पर ही ठकर गया है क्या कोई ऐसा आत्मवान-शक्तिमान मानव बचा ही नहीं भारत में जो उठे और इन महामूर्ख भ्रष्टाचारी नेताओं को ठिकाने लगा दे। जब कांग्रेस पप्पू और मिट्ठू बोलते हैं तो बीजेपी के ही नम्बर बढ़ा देते हैं और जब बीजेपी के पिट्ठू और टट्टू बोलते हैं तो कांग्रेस के नम्बर बढ़ जाते हैं। क्या ताजमहल क्या लालकिला क्या बहाई या क्या अक्षरधाम आदि आदि। ये सभी मध्य इमारतें क्या बिगाड़ रही हैं देश का मानवों का। जो इतना वाद-विवाद इन पर किया जाता है। जब भी देश में द्वेष घृणा हिंसा अराजकता और अभद्रता का विष…
