कर्मगति का ऋण विधान
हे मानव ! ध्यान से सुन आज की गाथा, ज्ञान का फैलाव न चाहे विधाता। थोड़ा ज्ञान, जीया हुआ ज्ञान ही मुक्त कर जाता। तू सदा एक ही रट लगाता है कि मुक्ति कैसे हो, कैसे मोक्ष प्राप्त हो? तो जान ले, बहुत कठिन नहीं यह काम। इसी शरीर में तू मुक्ति पाकर सदा आनन्द का अनुभव कर सकता है। भूल जा सब कुछ अगला- पिछला जन्म, दुख-सुख की प्रतीति, कर्मबंधनों की रीति। पिछले कर्मों की दुहाई देने से, उनसे छुटकारा पाने के क्षुद्र, छोटे-छोटे या वृहत बड़े-बड़े मार्ग अपनाने से कुछ नहीं होने वाला। इनका सीधा सा विज्ञानमय रहस्य जान। जरा सोच, तू क्या देता है, दे सकता है विशेषकर उसको जहाँ से तू लेता है यह जान कर उसका ऋण उतारता चल साथ के साथ हाथ के हाथ तभी जीवनोन्मुक्त आनन्द अनुभव कर पाएगा। परम कृपालु परमेश्वर ने बड़ा ही सुगम बनाया है यह विधान। इस संसार में…
