नया युग नई बात अब न चलेगी झूठ की घात करनी होगी ऐसी भावी पीढ़ी तैयार जो करे अपूर्णता पर वार रहा समय निहार कहे कण-कण पुकार हो धरती माँ का श्रंगार फैले सत्य प्रकाश और प्यार यही तो है प्रणाम का आधार यही सत्य है !! यहीं सत्य है !!
संपूर्ण सृष्टि प्रकृति का विस्तार है। यह ऊर्जा का एक द्रव्यमान है।
सब कुछ सिर्फ विस्तार है। जैसे कोशिका विभाजन। यूनिवर्स है
लगातार खुद से ही ब्रह्मांड का निर्माण। कुछ भी नष्ट नहीं होता
पूरी तरह से; अपशिष्ट भी ऊर्जा का एक स्रोत है। द टाइम व्हील - ‘ब्रह्म-
विष्णु-महेश 'निर्माण-पूर्णता-विनाश' - यह काम करता है।
यही सच्चाई है।