मैं प्रकृति ही हूँ
संत नहीं जो तांडव न करूँ
प्रत्येक अपूर्णता को नकारना ही धर्म है मेरा
पूर्णता को स्वीकारना पे्रम है मेरा
पूर्णता की ओर ले जाना कर्म है मेरा
यही सत्य है
मीना नामधारी जीव कुछ नहीं है कोई नहीं है
समय की उत्पत्ति हूँ …ऊँ
संभवामि युगे युगे हूँ ऊँ
प्रकृति की मानस पुत्री हूँ …ऊँ
जैसे वो है वैसी ही हूँ …ऊँ
मीना ऊँ
जो वो करती है वही करती हूँ …ऊँ
यही सत्य है !!
