आप ही अक्षर ब्रह्म आप ही तत्व बीज आप ही तत्व अविनाशी आप ही तत्व विनाशी आप ही तत्व सुबुद्धि आप ही तत्व कुबुद्धि आप ही तत्व शैतान आप ही तत्व भगवान मानव बुद्धि सुर में तो भगवान सुर में नहीं तो शैतान यही सत्य है। यहीं सत्य है।
नकारात्मक या सकारात्मक पहलुओं के बिना कुछ भी पूरा नहीं होता है।
दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
बुद्धिमत्ता यह है कि कैसे उन्हें संतुलित किया जाए और उनके लिए एक बल पैदा किया जाए
विकास और विकास।
यही सच्चाई है।