ऊर्जा का आह्वान

हमारे पास कार्य करने के लिए ज्ञान साधन और उपकरण हो सकते हैं, लेकिन शक्ति बल या सही मार्गदर्शन के बिना, हम कुछ भी प्राप्ति नहीं कर सकते। ब्रह्माण्ड में कोई ज्ञान नहीं है। उसमें केवल ऊर्जा होती है जो ज्ञान को प्रवाहित करती जाती है। सभी विकसित आत्माओं के विचार और ज्ञान वहां रहते हैं। इन ऊर्जाओं क आह्वान करके उन सब विकसित लोगों से जुड़कर, हम उनका शुद्ध ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि उनका आवाहन करना और पुकारना महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए यदि आप एक कलाकार हैं, तो देवी सरस्वती को प्रज्वलित करें। यदि चित्रकारी की आकांक्षा है तो प्रारम्भ में यह आपकी रेखाओं में कुछ बल लाएगा। फिर जैसे-जैसे अभ्यास बढ़ेगा, पकेगा यही रेखाएं जीवंत हो उठेंगी, रंग भी स्पंदित होने लगेंगे।

यदि लेखन कौशल में सुधार लाना है, तो विकसित लेखकों से जुड़े रहें, और उनके विचार आपकी लिखित अभिव्यक्ति में रिसने लगेंगे और पूर्ण समर्पण मेंं निरन्तर आह्वान के माध्यम से, आपका लेखन सत्यम् शिवम् सुंदरम् – सच्चा, परोपकारी और सुंदर होगा।

साधना करें, हर उस वस्तु के लिए ऊर्जा को प्रज्वलित करने का अभ्यास करें जिसके लिए कुशलता की आवश्यकता होती है। यह अंतरतम शांति से एक गहन प्रार्थना की तरह होना चाहिए। तभी कोई उस बिंदु तक पहुंच सकता है जहां ऊर्जा स्वत: ही मार्गदर्शन देगी और निर्देशित करेगी।

जब एक सीधा सम्पर्क बनता है, तो मस्तिष्क हस्तक्षेप करना बंद कर देता है, तब सभी शक्तियां समय की आवश्यकता के अनुसार उतरती हैं। तब जो भी काम किया जाए- खाना पकाना, सफाई, बागवानी, यह सुंदर होगा तथा वह वातावरण को भी सौन्दर्यमय बनाने हेतु सबको ही छुएगा।

  • प्रणाम मीना ऊँ

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