बड़ी तपस्या के बाद ही एक ऐसा भगवद्स्वरूप व्यक्तित्व उभरता है जिसके दर्शन में शीतलता प्रत्येक क्रिया में मधुरता वाणी में ओज और उपस्थिति में अद्भुत तेज होता है यही सत्य है यहीं सत्य है
सोते हुए जागते हुए
सोते समय जागते हुए, (सोते हुए - आराम ’की अवस्था में)
जागते समय कायाकल्प करने के लिए
और जब सो रहा हो तब जागरूक होना
लगातार जागरूकता
जागने या सोए जाने के बीच कोई अंतर नहीं
जागरूकता
हमेशा सचेत
जब कोई होश में होता है - एक रहता है
जब कोई नहीं होता है - एक मर जाता है।
यही सच्चाई है।